
नेपाल की पहाड़ियों से लेकर बिहार के मैदानों तक फैला एक चतुर और संगठित तस्करी नेटवर्क इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रहा है। जहां एक तरफ पुलिस बड़े-बड़े खेप पकड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ तस्कर नई-नई तरकीबों के साथ लगातार अपनी गतिविधियां तेज कर रहे हैं। नेपाल न्यूज की इस विशेष जांच में हमने इस ‘कैनाबिस कॉरिडोर’ के रूट, नेटवर्क, मुनाफे और चुनौतियों को खुलकर उजागर किया है।
सुन्सरी: तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा
सुन्सरी जिला इन दिनों नेपाल में गांजे की तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। अक्टूबर 2025 में कोशी रूरल म्यूनिसिपैलिटी-7 के एक खेत से पुलिस ने 537 किलोग्राम से ज्यादा गांजा बरामद किया। एक स्थानीय व्यक्ति दिनेश यादव गिरफ्तार हुआ। महज सात महीने बाद, मई 2026 में धरान में एक एंबुलेंस से 440 किलोग्राम गांजा पकड़ा गया। नवंबर 2025 में इनरुवा में एक स्कॉर्पियो से 153 किलोग्राम जब्त करने के लिए पुलिस को फायरिंग तक करनी पड़ी।

ये घटनाएं संयोग नहीं हैं। सुन्सरी में पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष (2025/26) में कुल 14,197 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है — जो कोशी प्रदेश के कुल जब्ती का 60 प्रतिशत से ज्यादा है। पिछले साल भी जिले का हिस्सा करीब आधा था। भांताबारी, लौकाही, श्रीपुर, हरिपुर जैसे इलाके और कोशी नदी के किनारे बिहार (सुपौल और अररिया जिलों) की ओर खुला बॉर्डर तस्करों के लिए स्वर्ग साबित हो रहा है।
सुन्सरी के एसपी केशव कुमार थेबे चिंता जताते हुए कहते हैं, “खुली सीमा, साप्तकोशी कॉरिडोर और गांवों की घनी आबादी के कारण कंट्रोल करना बेहद मुश्किल हो गया है। तस्कर अब प्राइवेट कार, ट्रक और एंबुलेंस — हर संभव साधन इस्तेमाल कर रहे हैं।”
धरान: ट्रांजिट हब और पहाड़ी उत्पादन का गेटवे
धरान इन दिनों तस्करी का बड़ा ट्रांजिट पॉइंट बन गया है। पहाड़ी जिलों खासकर धनकुटा, भोजपुर और उदयपुर में उगाया गया उच्च गुणवत्ता वाला गांजा यहां इकट्ठा होता है, फिर कोशी रूरल म्यूनिसिपैलिटी होते हुए भारत भेजा जाता है।
पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि धरान से अकेले पिछले साल 5,000 किलोग्राम से ज्यादा गांजा बरामद हुआ। एक बार तो धनकुटा की सरकारी एंबुलेंस में 480 किलोग्राम गांजा लादकर ले जाया जा रहा था, जिसे मोरांग के केराबारी में रोका गया।
कोशी प्रदेश पुलिस प्रमुख डीआईजी बिनोद घिमिरे बताते हैं, “धनकुटा में खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। तस्कर अब पुलिस के शक से दूर रहने वाले वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।”
मधेश क्षेत्र : गांजा का दूसरा सबसे बड़ा हब
कोशी के बाद मधेश प्रदेश दूसरे नंबर पर है। चालू वर्ष में यहां 12,750 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ। सप्तरी, सिराहा, धनुषा, बारा और पर्सा जैसे सभी बॉर्डर जिलों में सक्रिय तस्करी चल रही है। मकवानपुर और धादिंग से आने वाला माल यहां से बिहार पहुंचता है।
बिहार क्यों है आकर्षण का केंद्र?
बिहार नेपाल के गांजे का सबसे पुराना और बड़ा बाजार रहा है — 1976 में नेपाल में खेती प्रतिबंधित होने से पहले भी। यहां से यह माल यूरोप, अमेरिका और कनाडा तक जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार के कुछ कुख्यात तस्कर नेपाल में खेती में सीधे निवेश कर रहे हैं। नेपाल की पहाड़ी गांजा की क्वालिटी बेहतर मानी जाती है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय मांग बनी हुई है।
पूर्व डीआईजी हेमंत मल्ल ठाकुरी चेतावनी देते हैं, “पुलिस जितना पकड़ रही है, वो शायद कुल तस्करी का सिर्फ 15-20 प्रतिशत है। असली आंकड़ा कहीं ज्यादा भयावह है। सुन्सरी का बढ़ता जब्ती का आंकड़ा सफलता नहीं, बल्कि खतरे की घंटी है।”
खुली सीमा, भौगोलिक सुविधा, आर्थिक मुनाफा और बदलती तस्करी की शैली ये सब मिलकर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। धनकुटा जैसे उत्पादन क्षेत्रों में सख्त निगरानी की जरूरत है, न कि सिर्फ ट्रांजिट और बॉर्डर पर कार्रवाई।
नए एसपी नारायण रंजितकार जैसे अधिकारी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात कर रहे हैं, लेकिन मैदान में नतीजे दिखाने होंगे।
नेपाल-बिहार का यह गांजा कॉरिडोर सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक पूरी अर्थव्यवस्था और नेटवर्क है जो सीमा की कमजोरियों का फायदा उठा रहा है। जब तक उत्पादन के स्रोत पर प्रभावी कार्रवाई, बेहतर खुफिया तंत्र और दोनों देशों के बीच समन्वय नहीं बढ़ेगा, यह तस्करी रुकने वाली नहीं है।