
नई दिल्ली: I.N.D.I.A. गठबंधन की हालिया बैठक में विपक्षी दलों के बीच बढ़ती दूरियों और गठबंधन से अलग हुए सहयोगी दलों के कारणों पर गंभीर चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने विशेष रूप से उन परिस्थितियों की समीक्षा करने की मांग की, जिनके चलते कुछ दल गठबंधन से अलग हुए, जिनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं।
8 जून को दिल्ली के संविधान क्लब में आयोजित बैठक में दोनों युवा नेताओं ने कहा कि गठबंधन की कार्यप्रणाली का आत्ममूल्यांकन आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे राजनीतिक झटकों से बचा जा सके और रणनीतिक प्राथमिकताओं को पुनः निर्धारित किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, जब चर्चा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पर पहुंची—जिसने 22 लोकसभा सीटों के साथ कांग्रेस से मतभेदों के कारण गठबंधन से दूरी बना ली—तब अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक सहयोगी दलों के अलग होने के वास्तविक कारणों की गहराई से पड़ताल नहीं की जाएगी, तब तक भविष्य में ऐसे घटनाक्रमों को रोकना कठिन होगा। तेजस्वी यादव ने भी इस विचार का समर्थन किया।
बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “क्या नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने के लिए मैं जिम्मेदार हूं?” सूत्रों के मुताबिक, यह सवाल किसी प्रत्यक्ष उत्तर की अपेक्षा में नहीं पूछा गया था, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता द्वारा की गई इस टिप्पणी ने बैठक में मौजूद नेताओं के बीच चिंतन और असहजता का माहौल पैदा कर दिया।
नीतीश कुमार और I.N.D.I.A. गठबंधन का सफर
भाजपा-विरोधी राष्ट्रीय मोर्चे की अवधारणा को आगे बढ़ाने वालों में नीतीश कुमार प्रमुख थे। जून 2023 में पटना में आयोजित I.N.D.I.A. गठबंधन की पहली बैठक की अध्यक्षता उन्होंने ही की थी, जिसमें 16 विपक्षी दलों ने भाग लिया था। इसके बाद बेंगलुरु और मुंबई में भी गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठकें हुईं।
दिसंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित पांचवीं बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गठबंधन का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। वहीं, नीतीश कुमार को राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वीनर) का पद प्रस्तावित किया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गए।
बार-बार बदलते राजनीतिक समीकरण
नीतीश कुमार लंबे समय से अपनी राजनीतिक रणनीतियों और बदलते गठबंधन समीकरणों के लिए चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2013 में नरेंद्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्होंने NDA से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद 2015 में उन्होंने राजद के साथ महागठबंधन बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा। 2017 में वे पुनः NDA में लौट आए, 2022 में फिर राजद के साथ गए और 2024 में दोबारा NDA का हिस्सा बन गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजद और जद(यू) के बीच बढ़ते मतभेद भी उनके गठबंधन छोड़ने के कारणों में शामिल थे। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य द्वारा सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
यद्यपि आलोचक अक्सर नीतीश कुमार को “पलटू राम” कहकर उनकी राजनीतिक शैली की आलोचना करते हैं, लेकिन I.N.D.I.A. गठबंधन के कुछ नेताओं का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में चुनावी अंकगणित के लिहाज से नीतीश कुमार गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकते थे।
अब गठबंधन के घटक दल इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि सहयोगी दलों के अलग होने के कारणों का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण किया जाए, ताकि भविष्य में और राजनीतिक नुकसान से बचा जा सके तथा विपक्षी एकता को मजबूत किया जा सके।